भोरमदेव मंदिर (छत्तीसगढ़ का खजुराहो)

भारतीय पुरातत्व में छत्तीसगढ़ में भोरमदेव मंदिर का विशेष महत्व हैं। इस मंदिर की उत्कृष्ट वास्तुकला एवं अनुपम कलाकृति के कारण इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता हैं। मिथुन मूर्तिकला से संपन्न यह मंदिर इस अंचल की ऐसी धरोहर है, जो तत्कालीन समाज एवं कला का प्रतिनिधित्व करती है, इसीलिए मूर्तिकला समाज को समाज का दर्पण कहा जाता हैं। इस अनूठे मंदिर के निर्माण के पीछे कौन-सी भावना थी ? किन परिस्थितियों में इस मंदिर का निर्माण किया गया, जैसे यक्ष प्रश्नो को उत्तरीत करने इस कृति की रचना की गई है, जो एक कथानक के रूप में सरल, सुपाठ्य है, इस कृति की उपादेयता हैं। इस कृति से कला मर्मज्ञों, कलाविदों एवं जन सामान्य, श्रद्धालुओं एवं इतिहासविदों को एक नई जानकारी उपलब्ध कराने का विनम्र प्रयास हैं। (जिल्द में मूल्य-100 रू., छत्तीसगढ़ अस्मिता प्रतिष्ठान रायपुर)



 

 

 

 
 
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