छत्तीसगढ़ के सात अजूबे

छत्तीसगढ़ को अजूबों का गढ़ कहा जाता हैं। छत्तीसगढ़ अंचल रहस्यों एवं आश्चर्यों से भरा हैं। यहाँ प्राकृतिक एवं नैसर्गिक संपदा का अपार भण्डार हैं। छत्तीसगढ़ की शस्य श्यामला भूमि में अनेकों राजवंशों के उत्थान पतन एवं उनकी विकास की गाथा मिलती है । जिज्ञासुओं को प्रेरित करती है वहीं अनेक रहस्यों को जन्म देती है। छत्तीसगढ़ तत्कालीन राजवंशों की कलाप्रेम एवं उनकी धरोहर को समेटे हुये आज विद्यमान है जि नकी संरचना आज भी एक अजूबे के रूप में देखी जाती है। छत्तीसगढ़ के प्राचीन धरोहरों में से कुछ ऐसे प्रमुख धरोहर है जो प्राकृतिक एवं नैसर्गिक हैं एवं शासकों द्वारा निर्मित धरोहरों का चयन किया गया है। अप्रतिम कला कृति के कारण उन्हें अजूबे होने का गौरव प्राप्त है । आगन्तुक पर्यटक आज भी छ.ग. की इन कलाकृतियों को देखकर आश्चर्यचकित ही नहीं होते अपितु दांतो तले उंगली दबा लेते है। छत्तीसगढ़ के सात अजूबों में गणेश प्रतिमा बारसूर, चित्रकोट जलप्रपात बस्तर, कुटूम्बसर की भूगर्भित गुफा बस्तर, सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर, खरौद का लक्ष्मणेश्वर शिवलिंग, ताला की अद्भूत प्रतिमा कालपुरूष, सीताबेंगरा सरगुजा का प्राचीन नाट्यशाला प्रमुख हैं। प्रकृति की अद्भूत देन कहीं जाने वाली छत्तीसगढ़ में दो प्रकृति निर्मित एवं पाँच मानव निर्मित अजूबे हैं। प्रथम बार छत्तीसगढ़ की इन धरोहरों को रेखांकित कर प्रकाशित किया जा रहा है। जो पर्यटकों, अध्येताओं एवं शोधार्थियों, जिज्ञासुओं और विद्यार्थियों के लिये यह कृति उपयोगी सिद्ध होगी ऐसी कामना करता हूॅ ।

प्रकाशक - बी.आर. पब्लिशिंग कार्पोरेशन
नई दिल्ली - प्रथम संस्करण वर्ष 2014 मूल्य - 595/- आई.एस.बी.एन. 9789350501566
लेखक -डॉ. हेमू यदु, एल.आई.जी.-20,शैलेन्द्र नगर रायपुर छत्तीसगढ़ मो.- 094252-12537



 

 

 

 
 
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