डॉ. हेमू यदु छत्तीसगढ के जाने-माने पुरातत्वविद् है । इनका जन्म 8 अक्टूबर 1953 को रायपुर में हुआ था । इनकी शिक्षा एम0ए0एवं पीएचडी; पुरातत्वविज्ञान में पूरी हुई है । ये विगत 20 वर्षो से छत्तीसगढ के पुरावेभव में नवीनतम अन्वेषण कार्य कर है । पुरातात्विक धरोहर को दुनिया के समक्ष उजागर कर स्थापित करने हेतु कृत संकल्पित है ।

इन्होने अंतराष्ट्रिया खोज निम्न है

१. ओम नमःशिवाय एक सांकेतिक लिपि -  कापीराईट्स एल-19399/2001

२. विश्व प्रसिध्द ताला की अद्भूत प्रतिमा कालपुरुष -कापीराईटस एल-31302/2008

३. श्री रामवनगमन मार्ग -छत्तीसगढ पर रिसर्च कर , छत्तीसगढ के कोरिया से कोन्टा तक मार्ग खोज कर उस पर भौगोलिक पुरा-अन्वेषण कर मानचित्र तैयार कर प्रकाशित करना एवं कापीराईट पंजीयन प्राप्त करना है।

पुरातत्व के क्षेत्र मे विगत 25 वर्षो से सतत अन्वेषण कर रहे है । इनके कार्यानुभव अभिरुचि ,लगन व परिश्रम को देखकर इन्हे अनेक अलंकरण से सम्मानित किया गया है:-
१. छत्तीसगढ अस्मिता पुरस्कार भोपाल 1996

२. विश्व शांति के लिये समर्पित संस्था जैमिनी अकादमी हरियाणा से -शताव्दी रत्न सम्मान -2000 ।

३. छत्तीसगढ में जैन धरोहर पर अन्वेषण कार्य करने पर - अखिल भारतीय युवा जैन समाज दुर्ग से कलाश्री सम्मान ,राष्ट्रीय स्तर की सामाजिक संस्थाओं व्दारा नवरत्न सम्मान, समाजश्री सम्मान, एवं राष्ट्भाषा सम्मान से अलंकृत है ।

छत्तीसगढ मध्यमियक शिक्षा मंडल की दसवी कक्षा के हिन्दी विषय में इनके द्वारा किए गये खोज और जानकारी का उल्लेख है ।

विश्वा मॅ खगोल शष्तरियों और ज्योतिषविदो के मध्य बहस छिड़ी हुई है की ग्रह और ंक्स्त्रों के आधार पर अमेरिका के ज्योटिस शास्त्री श्री मर्की मैककेफ़री ने इस १३वी राशि को खोज निकाला है । इस राशि को सर्प शिर्स कहा जाता है । इस प्रकार सर्प को १३वी राशि मॅ माना गया है ।

छत्तीसगढ के बिलासपुर मॅ ताला ग्राम के देवरानी - जेठानी मंदिर के भगनावशेषो से प्राप्त विचित्र जीव - जन्तूयों से निर्मित प्रतिमा प्राप्त हुई है । इस प्रतिमा को हेमू यदु ने प्रतिमा के अंग -उपांगो मे अंकित १२ राशियों के आधार पर इसे कालपुरुष निरूपित किया है । इस प्रतिमा के कंधे मे सर्प का अंकन मिलता है । ऐसा प्रतीत होता है की राशियों मे सर्प भी एक राशि मानी जाती थी । अ त: ५-६वी शताब्दी की इस अद्भूत प्रतीमे मई सर्प का अंकन इसकी पुष्टि करती है की १३वी राशि सदियों पूर्व से थी । छत्तीसगढ के शिल्पकरो को इसकी जानकारी थी । यही कारण है की इस प्रतिमा मई सर्प का अंकन इस बात की पुष्टि करती है की १२ राशियों के अतरीकिट १३वे राशि के रूप मे सर्प का अंकन किया गया है । अ त: ता ला की कालपुरुष प्रतिमा इस तथ्य को निरूपत करती है की सदियों पूर्व ग्रह ंक्षत्रों के आधार पर १३वी  राशि के रूप मे विधयमान थी , जिसके प्रमाण स्वरूप विश्व की दुर्लभ प्रतिमा " कालपुरुष " छत्तीसगढ की अस्मिता के रूप मई आज भी विधयमान है ।

 

 

 
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