छत्तीसगढ़ में ईंट के प्राचीन मंदिर

भारतीय मंदिर वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करने वाला छत्तीसगढ़ में ईंटों के मंदिर की परम्परा मिलती हैं। इसे ईष्टिका कला कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में नदी संस्कृति रही है, नदी तट पर रेत और मिट्टी से बनाये गये ईंटों से नदी तट पर ही मंदिर बनाये जाने की प्राचीन परम्परा छत्तीसगढ़ में मिलती हैं। संभवतः भारतवर्ष में ऐसी अनूठी परम्परा अन्यत्र कहीं नहीं मिलती हैं। यहाँ महानदी के तट पर अनेक सांस्कृतिक धरोहर हैं। जिसमंे अधिकांश ईंटों के मंदिर हैं। इन मंदिरों में प्रमुख राजिम लोचन मंदिर राजिम, रामचंद्र मंदिर राजिम, लक्ष्मण मंदिर एवं राम मंदिर सिरपुर, लक्ष्मणेश्वर मंदिर खरौद, केवटिन मंदिर पुजारीपाली, सिद्धेश्वर मंदिर पलारी, धोबनी शिव मंदिर, अड़भार का शिव मंदिर, गढ़धनोरा के मंदिर, मल्हार के शिव मंदिर आदि प्रमुख हैं। ईंटों पर अनूठी शिल्पकारी इन मंदिरों की विशेषता हैं। छत्तीसगढ़ में छठवीं शताब्दी से लेकर ग्यारहवीं शताब्दी तक अनेक ईंटों के मंदिर निर्माण होने की जानकारी मिलती है। सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर को ईंटों का ताजमहल भी कहा जाता हैं। इस प्रकार इस कृति में ईंटों के मंदिर की निर्माण कथा प्रथम बार लेखबद्ध की गई। यह कृति शोधार्थी, विद्वानों, इतिहासकार, पुराविदों तथा प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। यह कृति प्रकाशनाधीन हैं।

 

 

 

 

 
 
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